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10 :10 बजे होता है कुछ ऐसा कि… जानें रहस्य

आज घड़ी सबकी जरूरत में शुमार हो गयी है. बिना घड़ी के आपको एक कदम भी चलना मुश्किल हो जाता है. घड़ी-घड़ी में आपको घड़ी देखनी होती है. अब तो मार्केट में भी स्टाइलिश घड़ियां आने लगी है. यह न सिर्फ आपकी पर्सनालिटी में निखार लाती हैं बल्कि समय भी बताती हैं. पर क्या आप जानते है कि सबसे पहले घड़ियों का इस्तेमाल किसने किया किया था. यही नहीं जब आप किसी वॉच शॉप में जाते हैं तब शायद आपने ध्यान दिया हो कि घड़ियों की सुइयां 10:10 पर ही क्यों होती हैं.  हम आपको ऐसी ही कुछ रोचक बातें बताने वाले हैं जो घड़ी और इनकी सुइयों से रिलेटेड हैं. तो आइए जानते हैं इनके बारे में –

कैसे हुई घड़ियों की शुरुआत –  

पहले के लोग सूरज की छाया को देखकर समय का पता लगाते थे. आप शायद यह जानते हो कि लगभग सवा दो हज़ार साल पहले प्राचीन यूनान यानी ग्रीस में पानी से चलने वाली अलार्म घड़ियां हुआ करती थीं जिसमें पानी के गिरते स्तर के साथ तय समय बाद घंटी बज जाती थी. और इसी से वह समय का पता लगा लेते थे. लेकिन आधुनिक घड़ी के आविष्कार का मामला कुछ पेचीदा है.

अब आप यह सोच रहे होंगे कि मिनट वाली सुइयों का आविष्कार कब हुआ और इसकी जरूरत क्यो पड़ी. तो यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि 1577 में स्विट्ज़रलैंड के रहने वाले महान आविष्कारक जॉस बर्गी ने अपने खगोलशास्त्री मित्र के लिए मिनट वाली घड़ियों का इनवेंशन किया. यह दिखने में काफी बड़ी होती थी. उनसे पहले जर्मनी के न्यूरमबर्ग शहर में पीटर हेनलेन ने ऐसी घड़ी बना ली थी जिसका नाम पोमैंडर घड़ी था और इसे एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया सके.

 

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सबसे पहले किसने पहनी थी हांथ में घड़ी –

घड़ियों की शुरुआत तो हो गयी पर जिस तरह की वॉच आज हम लोग अपने हाथों में पहनते हैं इसकी स्टार्टिंग कैसे हुई यह यहां बताया गया है. सबसे पहले आपको बताना चाहेंगे कि आज की तरह उस टाइम स्टाइलिश वॉच नहीं आती थी. शायद इसी वजह से इस व्यक्ति के हाथ में घड़ी पहनने से लोगों ने हंसी-मज़ाक करना शुरू कर दिया था. जी हां सबसे पहले हाथों में घड़ी पहनने वाले व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि जाने-माने फ़्राँसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल थे. ये वही ब्लेज़ पास्कल हैं जिन्हें कैलकुलेटर का आविष्कारक भी माना जाता है. इससे पहले लगभग 1650 के आसपास लोग घड़ी जेब में रखकर घूमते थे, ब्लेज़ पास्कल ने एक रस्सी से इस घड़ी को हथेली में बांध लिया जिससे कि वह काम करते समय घड़ी को आसानी से देख सकें. उनके कई साथियों ने उनका मज़ाक भी उड़ाया लेकिन आज हम सब हाथ में घड़ी पहनते हैं यह उन्हीं की देन है.

 

घड़ियों की दुकानों में क्यों बजे होते हैं 10:10 मिनट  –

जब आप घड़ियों की दुकान में जाते हैं या कभी विज्ञापन को देखते हैं तब आपने यह जरूर ऑब्जर्व किया होगा कि घड़ियों की सुइयां 10:10 मिनट पर ही दिखाई देती होंगी. ऐसा होना भी अपने साथ कई रहस्यों को समेटे हुए है. कोई भी बात अकारण नहीं होती हैं. आपको बता देन कि ऐसा होना या किया जाना मार्केटिंग के लिए अच्छा माना जाता है. साथ ही यह अपने साथ कई घटनाओं की यादों को संजोए हुए है. तो आइए जानते हैं इसके रहस्यों के बारे में-

  • ऐसा कहा जाता है कि इस समय घड़ी की सुइयां एक संतुलित आकार में होती हैं औरमनोविज्ञान के अनुसार हम Symmetrical चीज़ों को देखना ज़्यादा पसंद करते हैं‘.
  • जब ऐसे समय आप घड़ी को देखेंगे, तो आपको ऐसा लगेगा किघड़ी मुस्कुरा रही है, आपने हंसने वाली Smiley ज़रूर देखी होगी, घड़ी उस वक़्त बिलकुल ऐसी ही प्रतीत होती है. ये भी एक कारण है घड़ी में 10 दिखाने का.
  • घड़ी में जब 10:10 हो रहे होते हैं, तब एक संकेत वहां दिखता है ‘V’ का. ये संकेत विजय और जीत का होता है. तो ये भी एक कारण हो सकता है घड़ी में ’10 बज कर 10 मिनट’ दिखाने का.
  • ऐसा कहा जाता है कि इसी वक़्त अब्राहम लिंकनकी मृत्यु हुई थी. पर इसके बारे में लोगों के मन में भ्रांतियां भी हैं. पर उनकी मौत के समय घड़ी में रात के 10:10 बज रहे थे, ऐसा मान कर घड़ी में ये समय दिखलाया जाता है.
  • इस समय घड़ी पर मौजूद बाकी सारी चीज़ें,जैसे ब्रांड का नाम, कंपनी का लोगो  साफ़ दिखता है. इसलिए ये एक कारण हो सकता है घड़ी में निरंतर ये वक़्त दिखाने का.
  • कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि जिस वक़्त पहली घड़ी बनी थी या पूरी हुई थी, उस वक़्त यही समय हो रहा था. इसलिए घड़ी का डिफ़ाल्ट टाइम 10:10 ही सेट कर दिया गया था.
  • जानकारों का ऐसा भी कहना है कि इसी वक़्त ही हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला किया गया था. इसलिए इस हादसे में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए घड़ी का वक़्त 10:10 दिखाया जाता है.

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