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SC का सरकार को आदेश, 10 वर्ष नौकरी करने वाले स्थायी-अस्थायी कर्मचारियों को जनवरी 2018 से दो पैंशन

SC का सरकार को आदेश, 10 वर्ष नौकरी करने वाले स्थायी-अस्थायी कर्मचारियों को जनवरी 2018 से दो पैंशन

ज्वालामुखी: उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को उन सभी दैनिक भोगी कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2018 से पैंशन देने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने 10 या इससे अधिक वर्ष तक स्थायी-अस्थायी नौकरी की है। याचिकाकर्ता राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अलग-अलग तौर पर नियुक्त हुए व याचिकाकर्ताओं को 20 से 25 वर्ष तक अस्थायी नौकरी करने के उपरांत सरकार ने नियमित कर दिया लेकिन दुर्भाग्यवश इनकी नियमित सेवाएं 10 वर्ष से कम होने के कारण पैंशन पात्रता नहीं बन पाई। याचिकाकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में यह कहते हुए गुहार लगाई कि इनकी 20 से 25 वर्ष तक की अस्थायी नौकरी की 50 प्रतिशत अवधि को स्थायी अवधि में जोड़ कर 10 वर्ष की पैंशन की पात्रता के नियम को पूरा कर उन्हें पैंशन दी जाए।

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दायर की अपील
प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने 24 दिसम्बर, 2001 को अपने निर्णय के तहत याचिकाकर्ताओं की दलील को मान लिया, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने प्रदेश उच्च न्यायालय में अपील दायर की। राज्य सरकार की अपील पर फैसला सुनाते हुए प्रदेश उच्च न्यायालय ने 31 मई, 2012 को प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के निर्णय को निरस्त करते हुए कहा कि पैंशन की पात्रता के लिए अस्थायी नौकरी की अवधि को नहीं जोड़ा जा सकता। याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम, सुंदर बनाम हिमाचल सरकार एस.एल.पी. (सिविल) नम्बर 13674-13675/2013 के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी, विनोद शर्मा व अश्विनी गुप्ता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ताओं को राज्य में 20 से 25 वर्ष तक दैनिक भोगी के रूप में अस्थायी नौकरी करने के उपरांत मात्र 5 से 8 वर्ष तक स्थायी नौकरी करने का मौका मिला, जिस कारण स्थायी नौकरी के 10 वर्ष पूरा न होने पर उन्हें पैंशन जैसे मौलिक अधिकार से वंचित रखा गया जोकि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

5 वर्ष की अस्थायी अवधि को एक वर्ष स्थायी अवधि के तौर पर जोड़ कर दी जाए पैंशन 
उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने भी स्थायी कर्मचारियों जैसा व उतने ही समय तक कार्य किया है जिसका लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान हिमाचल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया व अभिनव मुखर्जी ने उच्चतम न्यायालय में दलील दी कि यदि न्यायालय याचिकाकर्ताओं को राहत देता है तो इससे राज्य सरकार को काफी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। अत: इस याचिका को खारिज किया जाए। वीरवार को मामले पर निर्णय सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल, न्यायाधीश आर.एफ. नरीमन व न्यायाधीश उदय उमेश ललित की 3 सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि दैनिक भोगी कर्मचारियों की 5 वर्ष की अस्थायी अवधि को एक वर्ष स्थायी अवधि के तौर पर जोड़ कर उन्हें पैंशन की पात्रता दी जाए। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से राज्य के हजारों दैनिक भोगी कर्मचारियों को लाभ होगा जो वर्षों से पैंशन की आस लगाए बैठे थे।

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