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861 साल पुराना ये किला, दूर से देखने पर लगता है सोने का महल

थार के रेगिस्तान में एक किला 861 साल से सीना ताने खड़ा है। दूर से देखने पर सोने के किले से कम नजर नहीं आता है। और सूरज की किरणों से रोशन हो यह सोने के समान दमकना शुरू हो जाता है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अपने आप में यह एक छोटे शहर को समेटे हुए है। इस किले में चार हजार लोग आज भी रहते है। तेरहवीं सदी में अल्लाउद्दीन खिलजी ने इस पर आक्रमण कर अधिकार जमा लिया।

कहा जाता है कि साल1156 में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने त्रिकूट पर्वत पर इस किले का निर्माण कराया था। उनके नाम पर ही जैसलमेर शहर की स्थापना हुई। जैसलमेर किले में कई खूबसूरत हवेलियां या मकान, मंदिर और सैनिकों और व्यापारियों के आवासीय परिसर हैं।

उस समय जैसलमेर की आबादी काफी कम थी। ऐसे में अपने लोगों को बाहर हमलों से बचाने के लिए किले के भीतर ही बसा दिया गया। यहीं कारण है कि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा किला है जिसमें आमजन भी राजा के साथ रहते थे।

इसे सोनार इसलिए कहते हैं कि यह किला दूर से देखने पर किसी सोने के किले से कम नजर नहीं आता है। रेत के टीलों के बीच त्रिकूट पहाड़ी पर 99 बुर्ज से घिरा यह किला जब ढलती सांझ की किरणों से मिलता है जो मानों यहां सब कुछ सुनहरा होकर रह जाता है और इस किले की इस स्वर्णिम आभा को निहारने वाला बरबस ही इसके सम्मोहन में कैद होकर रह जाता है।

रेगिस्तान में होने के कारण इस किले पर कम हमले हुए। इसके बावजूद कई बार युद्धों का यह किला साक्षी रहा। इस किले पर सबसे पहला हमला साल 1276 में जैतसी का राजा ने दिल्ली के सुल्तान की तरफ से हमला बोला। आठ साल बाद वह इस किले पर कब्जा जमा पाया।

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