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एक साल में योगी के सभी अच्छे कामों पर यह एक ‘नाकामी’ भारी पड़ गयी !

एक साल में योगी के सभी अच्छे कामों पर यह एक 'नाकामी' भारी पड़ गयी !

 

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने यूपी में अपना एक साल पूरा कर लिया है. संयोग कि इसी अवसर पर यूपी की गोरखपुर-फूलपुर सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें भाजपा की पराजय ने योगी सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया है. हालांकि इन चुनाव परिणामों से अलग अगर योगी सरकार के एक साल के काम-काज पर नजर डालें तो इस दौरान योगी सरकार ने लोकहित के तमाम कार्य किए हैं. इसमें किसानों की कर्जमाफी, एंटी रोमियो स्क्वाड, अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कठोर कार्रवाई, यूपी में निवेश के लिए इन्वेस्टर समिट का आयोजन इत्यादि तमाम कार्य हैं.

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लेकिन, योगी आदित्यनाथ की सरकार के इन तमाम कार्यों के बाद भी अगर एक साल बाद वे गोरखपुर और फूलपुर जैसी सीटों पर हार गए तो इसके पीछे मुख्य समस्या यही प्रतीत होती है कि हो न हो, उनकी लोकहित की योजनाएं पूरी तरह से जनता तक पहुँच नहीं सकी हैं. इसके लिए कारण ये है कि योगी सरकार नौकरशाही, जिसपर सरकार की योजनाओं को नीचे तक पहुँचाने का दायित्व होता है, को अपने नियंत्रण और निगरानी में रखने में विफल रही है.

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नौकरशाही अब भी गत सपा सरकार के प्रभाव में ही कार्य कर रही है. योगी सरकार की यही वो नाकामी है, जिसने उसके तमाम लोकहित के कार्यों की मिट्टी पलीद करके रख दी. संभव है कि उपचुनावों में पराजय के बाद योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस समस्या की तरफ जाए और वे इस सम्बन्ध में सजग हों. अगर ऐसा होता है तो ठीक है, वर्ना आगे भी ये समस्या उन्हें नुकसान पहुँचा सकती है.

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